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कलमवाले बाऊजी ………..बाजार गर्म…….

निर्विरोध निर्वाचन के बीच कलमवाले बाऊजी की बीजेपी में एंट्री की बेकरारी !

कलमवाले बाऊजी ………..
निम्बाहेड़ा में चर्चाओं का बाजार गर्म…….
निर्विरोध निर्वाचन के बीच कलमवाले बाऊजी की बीजेपी में एंट्री की बेकरारी !
विशेष रिपोर्ट-आकाश शर्मा
निम्बाहेड़ा । संसदीय लोकतंत्र और स्थानीय राजनीति के गलियारों में जब सत्ता का समीकरण पूरी तरह स्पष्ट हो, तो निर्विरोध निर्वाचन जैसी परंपराएं एक नई मिसाल कायम करती हैं। नगर परिषद निम्बाहेड़ा में भारतीय जनता पार्टी द्वारा हासिल किए गए स्पष्ट बहुमत और भीतरखाने दिखी मजबूत जुगलबंदी के दम पर सभापति पद पर शिल्पा भूतड़ा और उप सभापति पद पर नीलेश मेहता का निर्विरोध चुना जाना, इसी स्वस्थ राजनीतिक परंपरा का एक अनूठा उदाहरण है। राजनीतिक विश्लेषकों और विश्वस्त सूत्रों की मानें तो आगामी गुरुवार का दिन नगर परिषद के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। एक तरफ जहां धार्मिक और सांस्कृतिक उपमाओं के साथ यह चर्चा जोरों पर है कि ‘लक्ष्मी’ के रूप में शिल्पा भूतड़ा सभापति का पद सुशोभित करेंगी, वहीं ‘विष्णु’ के रूप में नीलेश मेहता उप सभापति के रूप में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे ।
परदे के पीछे का असली सियासी ड्रामा
लेकिन, इस पूरे निर्विरोध चुनाव प्रक्रिया और राजनीतिक हलचल के बीच असली सुगबुगाहट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सत्ता परिवर्तन की इस बयार में नगर परिषद के गलियारों से लेकर चाय की चौपालों तक सिर्फ एक ही चर्चा का बाजार गर्म है कलम वाले बाऊजी यानी नारद की भूमिका ! सूत्रों का दावा है कि नगर परिषद में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने और अपनी एंट्री सुनिश्चित करने के लिए कलम वाले नारद ने साम, दाम, दंड, भेद हर स्तर पर पुरजोर ताकत झोंक दी है। वे भाजपा के कद्दावर नेताओं और सत्ता के केंद्रों तक अपनी पैठ बनाने के लिए इस कदर बेकरार नजर आ रहे हैं कि हर दरवाजे पर दस्तक दी जा रही है । हो सकता है ‘विष्णु’ ही कलम वाले नारद को रास्ता दे दें ? बड़ा सवाल क्या कलम वाले नारद को मिलेगी एंट्री ? अब सबसे बड़ा और दिलचस्प सवाल यह खड़ा होता है कि क्या नगर परिषद नेतृत्व और स्थानीय गुटबाज़ी कलम वाले नारद के इस सियासी पैंतरेबाजी को स्वीकार करेगी ? क्या अपनी कलम की धार (चाटुकारिता) से चर्चा में रहने वाले बाऊजी को नगर परिषद के नए राजनीतिक समीकरणों में कोई स्थायी जगह मिल पाएगी या उनकी यह बेकरारी महज़ एक नाकाम कोशिश बनकर रह जाएगी ? आने वाला समय ही तय करेगा कि निम्बाहेड़ा नगर परिषद की इस बिसात पर कलम वाले नारद की एंट्री का मोहरा फिट बैठता है या फिर सत्ता के नए हुक्मरान उन्हें किनारे कर अपना परचम लहराते हैं !
आखिर कौन हैं ‘कलमवाले बाऊजी’? क्या नाम है उनका और क्या है उनकी गतिविधियों का सच? उनके अब तक के किए गए सभी कामों का पूरा कच्चा-चिट्ठा अब आपके सामने आने वाला है। सच्चाई की इस खास रिपोर्ट को पूरा जानने के लिए… बने रहिए हमारे साथ !”कलमवाले बाऊजी ………..
निम्बाहेड़ा में चर्चाओं का बाजार गर्म…….
निर्विरोध निर्वाचन के बीच कलमवाले बाऊजी की बीजेपी में एंट्री की बेकरारी !
विशेष रिपोर्ट-आकाश शर्मा
निम्बाहेड़ा । संसदीय लोकतंत्र और स्थानीय राजनीति के गलियारों में जब सत्ता का समीकरण पूरी तरह स्पष्ट हो, तो निर्विरोध निर्वाचन जैसी परंपराएं एक नई मिसाल कायम करती हैं। नगर परिषद निम्बाहेड़ा में भारतीय जनता पार्टी द्वारा हासिल किए गए स्पष्ट बहुमत और भीतरखाने दिखी मजबूत जुगलबंदी के दम पर सभापति पद पर शिल्पा भूतड़ा और उप सभापति पद पर नीलेश मेहता का निर्विरोध चुना जाना, इसी स्वस्थ राजनीतिक परंपरा का एक अनूठा उदाहरण है। राजनीतिक विश्लेषकों और विश्वस्त सूत्रों की मानें तो आगामी गुरुवार का दिन नगर परिषद के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। एक तरफ जहां धार्मिक और सांस्कृतिक उपमाओं के साथ यह चर्चा जोरों पर है कि ‘लक्ष्मी’ के रूप में शिल्पा भूतड़ा सभापति का पद सुशोभित करेंगी, वहीं ‘विष्णु’ के रूप में नीलेश मेहता उप सभापति के रूप में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे ।
परदे के पीछे का असली सियासी ड्रामा
लेकिन, इस पूरे निर्विरोध चुनाव प्रक्रिया और राजनीतिक हलचल के बीच असली सुगबुगाहट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सत्ता परिवर्तन की इस बयार में नगर परिषद के गलियारों से लेकर चाय की चौपालों तक सिर्फ एक ही चर्चा का बाजार गर्म है कलम वाले बाऊजी यानी नारद की भूमिका ! सूत्रों का दावा है कि नगर परिषद में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने और अपनी एंट्री सुनिश्चित करने के लिए कलम वाले नारद ने साम, दाम, दंड, भेद हर स्तर पर पुरजोर ताकत झोंक दी है। वे भाजपा के कद्दावर नेताओं और सत्ता के केंद्रों तक अपनी पैठ बनाने के लिए इस कदर बेकरार नजर आ रहे हैं कि हर दरवाजे पर दस्तक दी जा रही है । हो सकता है ‘विष्णु’ ही कलम वाले नारद को रास्ता दे दें ? बड़ा सवाल क्या कलम वाले नारद को मिलेगी एंट्री ? अब सबसे बड़ा और दिलचस्प सवाल यह खड़ा होता है कि क्या नगर परिषद नेतृत्व और स्थानीय गुटबाज़ी कलम वाले नारद के इस सियासी पैंतरेबाजी को स्वीकार करेगी ? क्या अपनी कलम की धार (चाटुकारिता) से चर्चा में रहने वाले बाऊजी को नगर परिषद के नए राजनीतिक समीकरणों में कोई स्थायी जगह मिल पाएगी या उनकी यह बेकरारी महज़ एक नाकाम कोशिश बनकर रह जाएगी ? आने वाला समय ही तय करेगा कि निम्बाहेड़ा नगर परिषद की इस बिसात पर कलम वाले नारद की एंट्री का मोहरा फिट बैठता है या फिर सत्ता के नए हुक्मरान उन्हें किनारे कर अपना परचम लहराते हैं !
आखिर कौन हैं ‘कलमवाले बाऊजी’? क्या नाम है उनका और क्या है उनकी गतिविधियों का सच? उनके अब तक के किए गए सभी कामों का पूरा कच्चा-चिट्ठा अब आपके सामने आने वाला है। सच्चाई की इस खास रिपोर्ट को पूरा जानने के लिए… बने रहिए हमारे साथ !”

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