
गुटबाज़ी और अहंकार का नतीजा………
मंत्री दक की हठधर्मिता ने डुबोई बड़ीसादड़ी भाजपा की नैया…………..
विशेष रिपोर्ट-आकाश शर्मा………
चित्तौड़गढ़ । बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जो करारी दुर्गति देखने को मिली है, उसकी पटकथा आज नहीं लिखी गई। सहकारिता मंत्री गौतम दक के मंत्री बनने के कुछ ही दिनों बाद संगठन की उपेक्षा, एकतरफा फैसलों और अहंकार की जो नींव रखी गई थी, आज पार्टी को उसी का खमियाजा भुगतना पड़ा है। जनप्रतिनिधियों और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी, मंत्री की तानाशाही कार्यशैली और इस सब पर प्रदेश नेतृत्व की रहस्यमयी चुप्पी ने आज भाजपा के इस सबसे मजबूत अभेद्य किले को ढहा दिया है ।
निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और गुटबाज़ी की शुरुआत
पिछले एक दशक में बड़ीसादड़ी में भाजपा का संगठन गुलाबचंद कटारिया के कुशल मार्गदर्शन और ज़मीनी कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से खड़ा हुआ था। लेकिन पिछले ढाई वर्षों में परिदृश्य पूरी तरह बदल गया । वर्षों से निस्वार्थ सेवा कर रहे पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर नए-नए आए ‘फूलछाप’ कांग्रेसियों को सिर-आंखों पर बैठाया गया । विधानसभा मुख्यालय बड़ीसादड़ी के बजाय जनसुनवाई डुंगला में रखी गई, जहाँ आम जनता की जगह केवल चुनिंदा स्वार्थी लोगों के काम किए गए । संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे मातृ संगठनों के कार्यकर्ताओं की राय को सरासर नज़रअंदाज़ किया गया । सहकारिता मंत्री बनने के बाद पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व सांसद सी.पी. जोशी और पूर्व मंत्री व विधायक श्रीचंद कृपलानी के साथ दक के रिश्तों की खटास अक्सर सुर्खियों में रही। सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाकर उन्होंने अपनी गुटबाज़ी की नीयत को साफ उजागर कर दिया।
गृह क्षेत्र में करारी हार और स्वाभिमान की जीत
पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों से ठीक पहले संपन्न हुए बड़ीसादड़ी नगरपालिका चुनावों में भाजपा अपने ही पारंपरिक वार्डों में ढेर हो गई । उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को महज 11 मत मिले। हद तो तब हो गई जब निर्वाचित 12 भाजपा पार्षदों में से एक ने NOTA को वोट दे दिया। यह हार केवल वोटों का आंकड़ा नहीं, बल्कि मंत्री गौतम दक द्वारा पिछले ढाई साल से कुचले जा रहे कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान की तीखी प्रतिक्रिया है ।
टिकट वितरण में मनमानी के विरोध में भाजपा नगर अध्यक्ष धनपाल मेहता और युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष राहुल मेहता सहित 45-50 पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा देकर जिलाध्यक्ष रतन लाल गाडरी के पास पहुँचना ही इस अंतर्विरोध का सबसे बड़ा प्रमाण था । यहाँ तक कि निम्बाहेड़ा में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्ति अनावरण पट्टिका पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सांसद सी.पी. जोशी और श्रीचंद कृपलानी का नाम तो था, लेकिन जिले के मंत्री गौतम दक का नाम न होना उनके राजनीतिक अलग-थलग पड़ने की पूरी कहानी बयान करता है।
2028 विधानसभा के लिए खतरे की घंटी
बड़ीसादड़ी की जनता और कार्यकर्ताओं ने इस चुनाव के जरिए आलाकमान को स्पष्ट संदेश दे दिया है “संगठन में कार्यकर्ता बड़ा होता है, नेता का अहंकार नहीं।” यदि प्रदेश व केंद्रीय नेतृत्व ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया और मंत्री गौतम दक की स्वार्थी व हठधर्मिता की राजनीति पर लगाम नहीं कसी, तो आज नगर निकाय हारे हैं। कल पंचायती राज चुनाव हाथ से निकलेंगे । और 2028 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए इस ‘सुरक्षित गढ़’ में जीतना असंभव हो जाएगा। जनता सब देख रही है और सही समय पर सही जवाब देना बखूबी जानती है।




