चंद ‘मंडी माफियाओं’ के चंगुल में दम तोड़ती हाथ-ठेला रेहड़ी वालों की ईमानदारी
आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ । चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक धरा पर रोज़ सुबह जब सूरज उगता है, तो उसके साथ ही सैंकड़ों छोटे-छोटे फुटकर फल विक्रेता,रेहड़ी और हाथ-ठेला चलाने वाले गरीब मजदूर अपने परिवार का पेट पालने की जद्दोजहद में निकल पड़ते हैं । इनकी हथेली के छालों और माथे के पसीने से इस शहर के आम नागरिकों को ताजे फल और सब्जियां नसीब होती हैं। लेकिन क्या किसी ने कभी सोचा है कि अलसुबह से लेकर देर रात तक हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले इन असहाय और संगठित क्षेत्र के छोटे दुकानदारों की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा कुछ रसूखदार ‘मंडी माफियाओं’ की तिजोरियों में अवैध तरीके से जा रहा है । हाल ही में ‘रिटेल हाथ ठेला फ्रूट यूनियन’ के बैनर तले चित्तौड़गढ़ सदर थाने में दी गई शिकायत ने थोक कृषि उपज मंडी के भीतर चल रहे एक भीषण और संगठित भ्रष्टाचार के सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर दिया है । यह केवल कानून के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे उन गरीब मजदूरों के निवाले पर डाका है, जो रोज़ कुआं खोदते हैं और रोज़ पानी पीते हैं।
अवैध ‘मंडी टैक्स’ की मार और ‘कच्चे खेल’ का काला कारोबार !
शिकायत के पन्ने किसी भी संवेदनशील नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी को झकझोरने के लिए काफी हैं। कृषि उपज मंडी में पैर जमाए बैठे चंद बड़े और नामी थोक व्यापारी जिनमें कानून का रत्ती भर खौफ नहीं बचा है इन गरीब फुटकर विक्रेताओं से जबरन 2 प्रतिशत “मंडी टैक्स या कमीशन” के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं । सबसे बड़ा तमाचा इस व्यवस्था पर यह है कि इस अवैध वसूली की न तो कोई सरकारी रसीद दी जाती है और न ही इसका कोई विधिक प्रावधान है । यह सीधे-सीधे गुंडा टैक्स की श्रेणी में आता है । इतना ही नहीं, देश में ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानी GST के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चित्तौड़गढ़ की इस फ्रूट मंडी में सरेआम GST Act 2017 की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं । थोक व्यापारियों द्वारा करोड़ों रुपये के माल का लेन-देन “कच्चे बिलों” पर किया जा रहा है । बिना किसी GST नंबर के पर्चियां फाड़ दी जाती हैं, जो न केवल इन छोटे व्यापारियों के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि सरकार के राजस्व को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का एक देशद्रोही कृत्य भी है ।
वजन का खेल, ईमानदारी फेल !
इस काले खेल की परतों को उघाड़ें तो ‘विधिक मापविज्ञान अधिनियम’ (Legal Metrology Act 2009) की आत्मा भी यहां सिसकती दिखाई देगी । फल बेचने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक कैरेट का अपना खुद का वजन करीब 1.5 से 2 किलोग्राम होता है । कायदे से इस वजन को घटाकर फलों का वास्तविक तोल होना चाहिए । लेकिन ताकत के मद में चूर थोक व्यापारी इस भारी-भरकम कैरेट को भी फलों के दाम पर तौल देते हैं । नतीजा ? हर एक कैरेट पर एक गरीब रेहड़ी वाले को 80 से 100 रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है । जो व्यक्ति दिनभर में बमुश्किल 300-400 रुपये कमा पाता हो, यदि उसकी जेब से रोज़ाना सैंकड़ों रुपये सिर्फ इस धोखाधड़ी के कारण छीन लिए जाएं, तो उसके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दो वक्त की रोटी का क्या होगा? यह बेईमानी की पराकाष्ठा है।
शर्तों का उल्लंघन और आपराधिक गुंडागर्दी !
मंडी के नियम कहते हैं कि APMC लाइसेंस धारी थोक व्यापारी केवल थोक का व्यापार करेंगे । लेकिन लालच की कोई सीमा नहीं होती। ये बड़े मगरमच्छ अब मंडी की शर्तों को ताक पर रखकर सीधे रिटेल (फुटकर) में भी ग्राहकों को माल बेच रहे हैं । एक तरफ तो ये फुटकर विक्रेताओं से अवैध कमीशन और तोल में चोरी कर उन्हें आर्थिक रूप से पंगु बना रहे हैं, और दूसरी तरफ उनका बचा-कुचा खुदरा बाजार भी हड़प लेना चाहते हैं । और जब इस अन्याय के खिलाफ कोई ‘कमल गुर्जर’ या अन्य पीड़ित फुटकर व्यापारी आवाज उठाने का साहस करता है, बिल की मांग करता है, या सही तोल की बात करता है, तो उसे क्या मिलता है? उन्हें मिलती हैं मां-बहन की गंदी गालियां, मुनीमों और गुंडों द्वारा हाथ-पैर तोड़ देने की धमकियां और “जो करना है वो कर लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता” जैसा अहंकार ! यह भाषा किसी सभ्य समाज की नहीं, बल्कि एक समानांतर आपराधिक तंत्र की है।
अब जागना होगा प्रशासन को !
फुटकर व्यापारियों ने पुलिस अधीक्षक (SP), मंडी सचिव और GST विभाग की एंटी-इवेजन विंग (उदयपुर) तक अपनी गुहार पहुंचा दी है । अब गेंद प्रशासन के पाले में है । क्या चित्तौड़गढ़ पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत इन रसूखदार नामजद व्यापारियों पर FIR दर्ज कर सलाखों के पीछे भेजेगी ? क्या GST विभाग इन ‘कच्चे पर्चों’ के आधार पर मंडी की दुकानों पर छापेमारी कर करोड़ों की टैक्स चोरी को पकड़ेगा? क्या मंडी प्रशासन इन थोक व्यापारियों के APMC लाइसेंस रद्द करने की हिम्मत दिखाएगा ?
यह लड़ाई केवल 250 फुटकर फल विक्रेताओं की नहीं है, यह लड़ाई चित्तौड़गढ़ के प्रशासनिक इकबाल और एक गरीब नागरिक के आत्मसम्मान की है । यदि आज इन गरीबों की सिसकी को दबा दिया गया, तो यह मान लिया जाएगा कि चित्तौड़गढ़ में कानून का नहीं, बल्कि ‘मंडी माफिया’ का राज चलता है। प्रशासन को तुरंत और ऐसी दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी जो नजीर बने, ताकि कोई भी अगली बार किसी गरीब की मेहनत की कमाई पर डाका डालने से पहले सौ बार सोचें ।
Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!