चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में ‘सत्ता’ के रसूख से लाखों के राजस्व का चूना !
उच्च राजनैतिक संरक्षण कवच बना बुन्दवाल का सहारा !

विशेष रिपोर्ट-आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ । शहर के उप नगर क्षेत्र चंदेरिया नगरीय क्षेत्र नगर परिषद चित्तौड़गढ़ में नियमों की धज्जियां उड़ाने और राजस्व की खुली लूट का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक शुचिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ रसूखदारों और भू-माफियाओं के गठजोड़ ने कथित तौर पर उच्च राजनैतिक संरक्षण का कवच पहनकर न केवल नगर परिषद के कायदे-कानूनों को ठेंगा दिखाया है, बल्कि सरकारी खजाने में सीधे तौर पर लाखों रुपये की सेंधमारी की है। यह महज एक प्रक्रियात्मक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक अपराध प्रतीत होता है, जहाँ ‘फाइल मैनेजमेंट’ के जरिए पुरानी मांगों को दबाकर परिषद के राजस्व को चपत लगाई गई। विडंबना यह है कि प्रशासन की नाक के नीचे, बिना किसी तकनीकी जांच, बिना वैध निर्माण स्वीकृति और बिना किसी औद्योगिक अनापत्ति प्रमाण पत्र के, अवैध रूप से विशालकाय कारखानों का संचालन शुरू कर दिया गया है। रसूख का आलम यह है कि सरकारी तंत्र मौन है और कानून के रखवाले अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर इस अवैध साम्राज्य को फलते-फूलते देख रहे हैं, जो सीधे तौर पर राजकोषीय घाटे और भविष्य में होने वाली किसी बड़ी औद्योगिक दुर्घटना को खुला निमंत्रण दे रहा है।”
5 लाख की ‘चपत’ और रसूख की ‘साठगांठ’ !
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खरीदे गए औद्योगिक भूखंडों को चंगेरिया ब्रदर्स के माध्यम से आनलाईन पत्रावलीयां हस्तांतरण करवानें का क्रेता कृष्णकांत बुन्दवाल एवं विनोद कुमार बुन्दवाल नें खेल बेहद शातिराना ढंग से खेला । चित्तौड़गढ़ नगर परिषद नें नवंबर 2024 में नगर परिषद कें नियमानुसार प्रति फाइल ₹2,24,780 जमा करने का आदेश दिया था । मोटी रकम बचाने के चक्कर में आवेदनकर्ताओं ने कथित तौर पर सांसद के प्रभाव और उनके बेहद करीबी के साथ मिलकर पुराने आवेदनों को फाइलों में दफन कर दिया । मई 2026 में सावित्री आर्किटेक्ट से नए सिरे आनलाईन पत्रावलीयां आवेदन लगाकर मांग राशि में भारी हेरफेर की गई, जिससे नगर परिषद को सीधे तौर पर लगभग 5 लाख रुपये के राजस्व की हानि पहुँचाई गई ।
गौरतलब व सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि दोनों ही समय (नवंबर 2024 व मई 2026) आयुक्त रविन्द्र सिंह यादव ही पदस्थापित हैं। आखिर उनके नाक के नीचे यह ‘फाइल मैनेजमेंट’ कैसे संभव हुआ ?
न नियम, न सुरक्षा मौत के साये में चल रहा कारखाना !
सिर्फ वित्तीय अनियमितता ही नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। डालडा मिल परिक्षेत्र में स्थित इन भूखंडों पर बिना किसी एकीकरण और बिना निर्माण स्वीकृति के विधि विरुद्ध तरीके से ‘ट्रेलर बॉडी और ट्रॉली निर्माण’ का कारखाना धड़ल्ले से चल रहा है । उप नगर क्षेत्र चंदेरिया में कब खतरे की घंटी बज जायें ,ये कहा नही जा सकता । सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कारखाने के संचालन के लिए किसी भी विभाग से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया है । सबसे गंभीर बात यह है कि यहाँ फायर सेफ्टी सिस्टम के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी गई है। घनी आबादी और औद्योगिक क्षेत्र के पास बिना सुरक्षा मानकों के यह कारखाना किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल !
क्या चित्तौड़गढ़ नगर परिषद रसूखदारों के आगे नतमस्तक हो चुकी है ? क्या भ्रष्टाचार की इस गंगा में ऊपर से नीचे तक सब हाथ धो रहे हैं ? पुराने आवेदन को छिपाकर नया आवेदन स्वीकार करने वाले दोषियों पर कार्रवाई कब होगी ? बिना निर्माण स्वीकृति के चल रहे कारखाने को अब तक सीज क्यों नहीं किया गया ? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिला प्रशासन की नींद टूटेगी ?
जल्द ही उच्च राजनैतिक संरक्षण कवच के नामों का खुलासा किया जावेंगा ।




